Udit Rathod

धागे रिश्तों के

धागे रिश्तों के
अक्सर टूट जाया करते है;
बांध भी दो!
गांठ तो ये छोड़ जाया करते है;
कोई कैसे करे मोहब्बत फिर से पहली बार!
दूसरी बार तो
सब समझौता करके
खुदको समझा दिया करते है।

देखते देखते सब पहले जैसा हो जाएगा

की फिर एक दिन ये धुंधली सी यादें भी मीट जाएगी मेरी, जो तुम्हे परेशान करती है। एक दिन तुम्हारे ख़यालो से मिलना भी बंध हो जाएगा जिन्हें मैं आज भी वक़्त निकाल कर मिलता हू।

उस दिन के बाद एक फोन आएगा गलती से मेरा तुम पर और तुम कहोगी माफ करना wrong number है। और में डायल किए नंबर को देखूंगा और कहूंगा माफ कीजिएगा गलती से 9 की जगह 0 दबा दिया था।

और तुम बिना कुछ कहे फोन काट दोंगी और में 9 लगाकर फिर से फोन लगाऊंगा।

और देखते ही देखते सब पहले जैसा हो जाएगा।

गले लगाओ ना

अच्छा सुनो!

तुम्हारा पसंदीदा गाना आ रहा है रेडियो पे। लग जा गले के फिर ये रात हो ना हो। तुम्हारी तस्वीर को गले लगा कर सुना पूरा गाना। नहीं! नहीं! हार नहीं लगाया है मैंने तुम्हारी तस्वीर पर, तुम तो अभी जिंदा हो मुझमें।

हा मैं भी बदल गया हूं।

अच्छा सुनो!

उस रोज़ जब हम मिले थे तब तुमने कहा था कि मैं अब पहले जैसा नहीं रहा; बदल गया हूं। सच कहा था, मैंने अपने आप को बदला ज़रूर है पर तुम्हारे बाद।

सच की तलाश, जूठ में!

कुछ लोग सच ढूंढते है, जूठ में
जताते है की उनको सच में सच की परवाह है;
पर सच तो ये है कि
जब सच, सच! में सामने आता है;
तब वहीं लोग छुप जाते है।

रोशनी की किरण

उस अंधेरे कमरे में बंध दरवाज़े के कोने से
एक रोशनी की किरण आ रही थी।

और फिर,

आंख खुली, सपना टूटा
दरवाज़े को खुला पाया
पर कमरे से भी ज़्यादा
अंधेरा कमरे के बाहर पाया।

गप्पे – सप्पे

बाते बनाना और बाते करना
इन दोनों में काफी अंतर होता है।

और मुझे बाते करना बहुत अच्छा लगता है,
Chat पे नहीं होती बाते मुझसे, वो बात अलग है।

बाकी मिलो कभी, बाते बहुत है मेरे पास बताने को।

और हा! उन लोगो से बात करने का मज़ा ही अलग है
जो बातो को अपने दिल और दिमाग तक पहचाने से पहले
अपने सीने से लगाते हैं।

अगर आपकी ज़िन्दगी में ऐसा कोई है तो भाई उनकी बाते भी सुनना। 😅 अपनी ही मत चलाते रहना।

चलिए आज के गप्पे–सप्पे में इतना ही, जल्द मिलेंगे।