Category: अर्ज़ किया है

धागे रिश्तों के

धागे रिश्तों के
अक्सर टूट जाया करते है;
बांध भी दो!
गांठ तो ये छोड़ जाया करते है;
कोई कैसे करे मोहब्बत फिर से पहली बार!
दूसरी बार तो
सब समझौता करके
खुदको समझा दिया करते है।

चलना ज़रूर..

रफ्तार भले ही धीमी रखना
पर चलना ज़रूर।
अपने आप से किया वादा
निभाना ज़रूर।

ज़िन्दगी अगर हार–जीत का खेल है
तो दुनिया से नहीं,

अपने आप से जीतने की ज़िद
रखना ज़रूर।