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सही या ग़लत

सब कुछ लिखा जा चुका है, 
सब कुछ कहा जा चुका है।

ना तुम कुछ नया लिख रहे हो, 
ना मैं कुछ नया कह रहा हूं।

नया कुछ नहीं है, बस नया नया तरीका ढूंढ रहे है हम सब,
वहीं सब बाते कहने का जिसे ना जाने कितनी बार कहा गया है।

पर तुम्हारा भी पूरा है हक है फिर एक बार कोशिश करने का, मेरा ही पूरा हक है फिर एक बार फिर सब कहने का।
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कोई सही है, कोई ग़लत
कोई सही गलत के बीच में है।

हम आज भी सही गलत को दीवार बना कर खड़े है, इसीलिए हम साथ नहीं आमने सामने खड़े है।

खैर सही गलत के खैल में सब गलत ही निकलते है अंत में।

सब वैसे इंतजार में रहते है उस दीवार के टूटने का, और कोई कहीं से आकर दीवार तोड़ कर पुल बना कर चला जाता है।

अब उस पर चलना ना चलना सही गलत पे छोड़ देते है।

क्यों की रास्ता दोनों तरफ जाता है, 
और दोनों तरफ कोई सही है तो कोई ग़लत।

दोनों तरफ सारे सही कोई ना कोई गलत से जुडे है,
तो फैसला करना कठीन होगा कि पुल पर पहला कदम को उठाएगा। 

सही या ग़लत?

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Bahot se safar se takaraoge